स्वाति, निरुपमा सिंह
कला मानव सभ्यता की सामूहिक चेतना, लोक विश्वासों और सांस्कृतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है । यह केवल सौंदर्यबोध तक सीमित न रहकर समाज के धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय परिवेश को दृश्य रूप में प्रस्तुत करती है । भारतीय कला परंपरा प्रागैतिहासिक शैल चित्रों से लेकर भित्ति चित्रों और लघु चित्र शैलियों तक एक सतत विकास प्रक्रिया का परिणाम है । इस शोध-पत्र में कला को लोक मन की अभिव्यक्ति के रूप में समझते हुए भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System-IKS) के संदर्भ में हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी भित्ति चित्रण परंपरा का विश्लेषण किया गया है । विशेष रूप से शिव लीला के चित्रण, लोक जीवन से उसके संबंध, चित्रण तकनीकों, रस-भाव की अभिव्यक्ति पर प्रकाश डाला गया है । यह अध्ययन दर्शाता है कि हिमाचल की भित्ति चित्रण परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक संरचना, लोक विश्वास और सांस्कृतिक पहचान का सजीव दस्तावेज भी है ।
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