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International Journal of Arts, Humanities and Social Studies
Peer Reviewed Journal

Vol. 7, Issue 2, Part B (2025)

राज्यपाल के संवैधानिक कार्य एवं शक्तियाँः भारत के विशेष संबन्ध में

Author(s):

नरेन्द्र कुमार मीना

Abstract:
भारतीय संविधान के संघीय ढाँचे में राज्यपाल का पद अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना गया है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जो केंद्र और राज्य के मध्य एक सेतु के रूप में कार्य करता है। संविधान के अनुच्छेद 153 से 162 में राज्यपाल के पद और उसकी शक्तियों का उल्लेख मिलता है। राज्यपाल की भूमिका बहुआयामी है। वह राज्य की कार्यपालिका का मुखिया है, विधायिका का अंग है, न्यायिक शक्तियों का धारक है तथा आपात स्थितियों में विशेष विवेकाधीन अधिकारों से संपन्न है। यद्यपि व्यवहार में उसकी भूमिका अक्सर विवादित रही है, फिर भी उसका महत्व भारतीय लोकतांत्रिक ढाँचे की मजबूती के लिए अत्यावश्यक है। इस शोध पत्र में राज्यपाल के कार्यों, संवैधानिक शक्तियों, नियुक्ति, विवेकाधीन अधिकार, न्यायालयीय दृष्टिकोण, व्यावहारिक चुनौतियाँ, सुधार की संभावनाएँ पर प्रकाश डाला गया हैं। साथ ही इस अध्ययन में जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्ति के पूर्व एवं उपरान्त राज्यपाल के अधिकार पर चर्चा की गई है।

Pages: 130-135  |  1077 Views  728 Downloads


International Journal of Arts, Humanities and Social Studies
How to cite this article:
नरेन्द्र कुमार मीना. राज्यपाल के संवैधानिक कार्य एवं शक्तियाँः भारत के विशेष संबन्ध में. Int. J. Arts Humanit. Social Stud. 2025;7(2):130-135. DOI: 10.33545/26648652.2025.v7.i2b.303
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